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Mann Ke Mrigchhaune


पं. रामनारायण उपाध्याय के मन के ये मृगछौने आपके मन-उपवन में वैसे ही कुलाँचें भरेंगे, जैसे मृग मधुवन में भरते हैं। ये कविताएँ अपने लघु आकार में होकर भी अपने दीर्घ संदेश को लेकर अंतर्मन के ताल में संवेदनाओं की काँकरी फेंकती हैं। आदरणीय दादा की इन रचनाओं में आपको यथार्थवाद और छायावाद का आनंद मिलेगा तथा रूपक, उपमाओं की सुरभि भी। कहीं-कहीं ये कविताएँ आपसे संवाद भी करती हैं, कहीं पर समाज के परिवेश पर सलोना व्यंग्य भी करती हैं-

“”फर्श पर मोजेक
दीवारों पर संगमरमर
छत में प्लाईवुड
कहीं माटी का कतरा नहीं..
बिना माटी का स्पर्श पाए.
यहाँ कुछ उगेगा कैसे.””

उनकी रचनाओं में प्रतीकों और बिंबों का सहज आगमन चमत्कृत करता है, इसी कारण ये सहज-सरल, निश्छल रचनाएँ बड़ी अपनी सी और मन के करीब लगती हैं।”

Rs.270.00 Rs.300.00

(Author) Pt. Ram Narayan Upadhyaya

ISBN 9789348724373
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2025
Number of pages 152
Binding Style Soft Cover

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.5 in

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