प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान है। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५० से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष हैं।
विशेषः प्रो० तिवारी का २०२३ में एक साथ ६१ पुस्तकों का प्रकाशन जो कि एक विश्व कीर्तिमान है।
Pandit Deenadayaal Upaadhyaay Kee Kahasyamay Mrtyu Ka Sach
१९६७ के कालीकट अधिवेशन में उपाध्याय जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वह मात्र ४३ दिन जनसंघ के अध्यक्ष रहे। १०/११ फरवरी, १९६८ की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई। टखना टूटा था, सिर पर चोट लगी थी, दाहिने बांह पर खून का निशान था और मुट्ठी में ५ रुपये का नोट। ११ फरवरी को प्रात: पौने चार बजे सहायक स्टेशन मास्टर को खंभा नं० १२७६ के पास कंकड़ पर पड़ी हुई लाश की सूचना मिली। प्रात:काल रेलवे का डाक्टर घटना स्थल पर पहुंचा और जांच-पड़ताल करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। रेलवे पुलिस ने शव का फोटो खींचा। शव को कोई पहचान न सका और उसे लावारिस घोषित कर दिया। लगभग छ: घंटे के बाद शव को प्लेटफार्म पर लाकर रखा गया। मुगलसराय नगर के संघ कार्यकर्ता गुरुबक्श सिंह कपाही ने शव की पहचान दीनदयाल उपाध्याय के रूप में की। पल भर में बिजली के करंट की तरह यह समाचार जनता में फैल गया। सभी लोग स्तब्ध रह गये । जनसंघ के अनेकानेक कार्यकर्ता वहां एकत्रित हो गये । लखनऊ और दिल्ली को इस दु:खद घटना की सूचना तुरन्त फोन द्वारा दी गई। पू० गुरुजी को भी फोन से सूचना दी गई। दिल्ली में संसदीय दल की जो बैठक चल रही थी वह तुरन्त स्थगित हो गई। भागदौड़ शुरू हो गई। चारों ओर शोक की लहर फैल गई। लोगों ने कहा कि ऐसे कर्मयोगी और तपस्वी के प्राणों का दुश्मन कौन बन बैठा। यह रहस्य अभी तक बना हुआ है।
Rs.550.00
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.5 × 1.5 in |
Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9788119202096
Language Hindi
Publisher Luminous Books
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