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Premchand Ki Vyangya Kathayen


‘‘कहानी फ़ुरसत की चीज़ है। काम-धाम से छुट्टी पाकर सुनने की चीज़। जल्दबाज़ी से काम बिगड़ जाता है। प्रेमचंद के कहानी कहने में यह फ़ुरसत का भाव मिलता है। वह कहानी सुनाते हैं। अक्सर लच्छेदार ज़बान में, वाक्यों को स्वाभाविक गति से फैलने की आज़ादी देकर, अंग्रेज़ी बाग के माली की तरह उनकी डालियाँ और पत्ते कतरकर नहीं, फूलों और पत्तों को हवा में बढ़ने और लहराने की आज़ादी देकर। ज़िन्दगी के अनुभवों पर टीका-टिप्पणी भी साथ में चला करती है, व्यंग्य, अनूठी उपमाएँ और हास्य बीच-बीच में पाठक को गुदगुदाते हैं।’’ – डॉ. रामविलास शर्मा, सुप्रसिद्ध आलोचक गुदगुदाती पन्द्रह कहानियों का संकलन है इस पुस्तक में। प्रेमचंद हिन्दी के सबसे लोकप्रिय लेखक हैं जिनकी पुस्तकें आज भी हर वर्ग और उम्र के पाठक बहुत शौक से पढ़ते हैं। इन कथाओं में जहाँ गुदगुदाने वाला हास्य है वहीं सामाजिक विडम्बनाओं पर तीखा व्यंग्य भी। प्रेमचंद के विशाल कथा साहित्य से चुनकर इन कहानियों को डॉ. पल्लव ने प्रस्तुत किया है। समर्थ गद्य आलोचक पल्लव की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। वे दिल्ली के प्रसिद्ध हिन्दू कॉलेज में पढ़ाते हैं।

Rs.250.00

ISBN 9788198412263
Author Pallav
Language Hindi
Publisher Rajpal And Sons
Pages 160 Pages

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.5 in

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