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Raazmahal


सब कुछ हो जायेगा। आप बस हाँ बोलो। अगले दस दिन तो आप वहाँ छुपोगी जहाँ कोई सोच भी न पायेगा। सारे देश में आपकी तलाश होगी पर वहाँ नहीं, जहाँ मैं आपको ले जाऊँगा।’ सनम ने कहा।
मधु ने प्रश्नसूचक निगाहों से सनम को देखा। वो तीसरी सिगरेट सुलगा चुकी थी।
‘कहाँ?’ फिर उसने जुबान से भी पूछा।
‘राजमहल।’ सनम ने कहा।
‘क्या? राजमहल ?’
‘जी, राजमहल। कौन सोचेगा कि आप वहाँ हो सकती हैं। मुझे दस दिन राजमहल में रहना है। आप मेरे साथ चलो।’ उसने कहा।
‘अच्छा। मेरे वहाँ जाते ही सब जादू के ज़ोर से अन्धे हो जायेंगे। कोई मुझे पहचानेगा ही नहीं। फिर क्या समस्या है। ऐसा हो जाये तो हम सदा ही वहाँ क्यों न रहें?’ मधु ने विनोदपूर्ण स्वर में कहा।
सनम ने आहत भाव से उसे देखा।
‘रानी साहिबा । मैं वहाँ आपको ऐसे बना कर ले जाऊँगा कि आईना भी आपको पहचान न पायेगा। आप बस हाँ कहो।’ सनम ने कहा ।
मन में डर घर कर जाये तो शरीर का सुरक्षा चक्र ख़ुद ही सक्रिय हो जाता है। मधु के साथ भी यही हो चुका था।

****

क़ुदरत की गोद में बसी इस घाटी की इस ख़ुशनुमा आलीशान शाम के सीने में भी जैसे किसी ने चाकू घोंप दिया था। माहौल ग़मजदा हो गया था। तमन्ना तय न कर पा रही थी कि वो मुझे आगे बोलने को कहे या न कहे। आगे के अंजाम से बेफ़िक्र विभा गुप्ता के चेहरे पर परम सन्तोष के भाव थे। मधुमालिनी सनम के साथ चिपक कर खड़ी हैरत से सब सुन रही थी। प्रलाक्षा को अहसास हो गया था कि मैं कुछ ऐसा कहने जा रहा था जो प्रतिकार की आइन्दा ज़िन्दगी पर विपरीत असर डाल सकता था, वो प्रार्थना के भाव से मुझे देख रही थी।

Rs.355.00 Rs.395.00

Author: Mukesh Bhardwaj
Publication : Vani Prakashan

Weight 0.650 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.5 in

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