Author Rajeev Saxena
ISBN 9789355212498
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2024
Number of pages 200
Binding Style Soft Cover
Saans Ke Rahasya
इस पुस्तक में साँस से संबंधित बेहद गोपनीय और अत्यंत प्राचीन आध्यात्मिक विध्या के बारे में बताया गया है। इसे जान-बूझकर गुप्त रखा गया था, जिसकी वजह से आज यह ज्ञान लुप्त सा हो गया। साँस का मतलब जीवन का लक्षण मात्र नहीं, बल्कि हमारी साँस में इतने रहस्य छिपे हैं, जिनकी गिनती भी मुश्किल है। हमारा खाना-पीना, सोना-जागना, सेक्स, स्वास्थ्य, बीमारी यानी भौतिक जीवन की कोई भी क्रिया हो या आध्यात्मिक साधना, ध्यान/मेडिटेशन–मतलब हम कुछ भी करें–उसकी सफलता या असफलता इस बात पर पर निर्भर करती है कि उसे करते समय हमारी साँस कैसी थी। असल में, हमारी साँस लगातार बदलती रहती है। साँस में जरा से बदलाव से मन की स्थिति भी बदल जाती है। यह सब साँस के साथ चल रही नाड़ियों के कारण होता है, जो 24 घंटे बदलती रहती हैं। लेकिन इन सूक्ष्म क्रियाओं की ओर कभी हमारा ध्यान नहीं जाता, क्योंकि हम साँस लेने का काम, दिमाग का इस्तेमाल किए बगैर ही करते रहते हैं। जबकि कोई भी बड़ी आसानी से इन रहस्यों को खुद अनुभव करके इनसे लाभ उठाकर जीवन को सरल बना सकता है।यह पुस्तक आसान भाषा में DIY (डू इट योर सेल्फ) की शैली में लिखी गई है।
Rs.315.00 Rs.350.00
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.7 × 1.5 in |
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