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Sanatan Bhartiya Yoga Practice and Its Various Meditation Practices


आचार्य शीलक राम
आचार्य शीलक राम का जन्म एक किसान परिवार में 1965 ई. में हुआ। आपने अपनी शिक्षा की शुरूआत गाँव के ही विद्यालय से शुरु करके उसमानिया विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं दिल्ली विश्वविद्यालय से संपन्न की। आपने दर्शनशास्त्र, हिंदी व संस्कृत विषयों से स्नातकोत्तर परीक्षाएं उत्तीर्ण करके दर्शनशास्त्र विषय से एम.फिल्. व पीएच.डी. की उपाधियां अर्जित की। इसके साथ ही आपने ‘दर्शनशास्त्र’, ‘धार्मिक अध्ययन’ एवं ‘जैन- बौद्ध-गाँधी व शांति अध्ययन’ विषयों से नेट (UGC NET) परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। लेखक ने महान् दार्शनिक ऋषि दयानंद, योगिराज अरविंद, जिद्दू कृष्णमूर्ति, ओशो रजनीश आदि की योग-साधना तथा सनातन भारतीय हिंदू योग साधना में पारंगत हिमालय के योगियों के मार्गदर्शन में कई वर्षों तक योग साधना की। आपने कई महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया है। इस समय आप कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंतर्गत ‘दर्शनशास्त्र विभाग’ में असिसटेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। आपने बचपन से ही लेखन कार्य शुरू कर दिया था। अब तक आपकी पचास पुस्तकों का लेखन हो चुका है जिनमें से पच्चीस प्रकाशित हो चुकी हैं। आपकी प्रकाशित प्रसिद्ध पुस्तकों में भगवान् का गीत ढाई आक्खर प्रेम का आंक्ख्यां देक्खी • जीवन-दर्शन एवं संस्कृति लूट सके तो लूट दर्शन ज्योति सांगी पं. लखमीचंद के सांगों का दार्शनिक विवेचन अमृतकलश हरियाणवी लोक साहित्य में दर्शन की अवधारणा : बाजे भगत एवं पं. लखमीचंद के विशेष संदर्भ में जागो भारत ब्रह्मज्ञानी कौन? महायोद्धा श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा विश्वगुरू भारत भारतीय दर्शन की सनातन परंपरा भगवान् बुद्ध का आर्य वैदिक सनातन हिंदू-दर्शन सनातन भारतीय योग साधना एवं उसकी विविध ध्यान-विधियाँ सम्मिलित हैं। आपकी दो पुस्तकों ‘भगवान् का गीत’ व ‘ढाई आक्खर प्रेम का’ को हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला द्वारा सम्मानित किया गया है। आप हरियाणवी भाषा के भी प्रसिद्ध कवि, लेखक एवं आलोचक हैं। काव्य, आलोचना, दर्शन एवं योग में आपकी गति विस्मयकारी है। सनातन भारतीय आर्य हिंदू वैदिक संस्कृति, योग, दर्शन, जीवन मूल्यों तथा राष्ट्र भाषा के प्रति आपकी असीम श्रद्धा है तथा इनके प्रचार-प्रसार हेतु आप सतत् कार्यरत हैं। इसके साथ आप दस अंतर्राष्ट्रीय रैफरीड रिसर्च जर्नल्स के संपादक एवं स्वामी हैं। इन जर्नल्स के नाम हैं
‘चिंतन’, ‘प्रमाण’, ‘द्रष्टा’, ‘दर्शन’, ‘दर्शन-ज्योति’, ‘स्वदेशी’, ‘ABSURD’, ‘AWARENESS’, ‘JUSTICE’ एवं ‘VISION’ I
विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च जर्नल्स में आपके पचास शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों में भी आपके 300 के लगभग लेख प्रकाशित हो चुके हैं। इस समय आप अध्यापन के साथ-साथ योगाभ्यास करवाने, लेखन करने, राष्ट्रभाषा हिंदी का प्रचार-प्रसार करने तथा सनातन भारतीय जीवन-मूल्यों की प्रासंगिकता को समस्त जगत् को समझाने हेतु कार्यरत हैं।

Rs.699.00 Rs.795.00

Publisher: Kalpana Prakashan, New Delhi
Author Acharya Shilak Ram
Language: Hindi
Cover: HARDCOVER
ISBN: 9788188790906

Weight 0.850 kg
Dimensions 8.7 × 5.51 × 1.57 in

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