- Rakesh Sinha
- 9789355627773
- Hindi
- Prabhat Prakashan
- 1st
- 2024
- 152
- Soft Cover
Sanskriti Ka Pravah (PB)
“प्रस्तुत पुस्तक भारतीय समाज के उन आयामों को स्पर्श करते हुए उनका जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है, जो उपेक्षित या ओझल रहे हैं। इनमें विमर्श की प्रकृति, धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विभिन्न आयाम, विऔपनिवेशीकरण इत्यादि प्रमुख हैं। पुस्तक की विशेषता है कि इसमें हर पग पर ऐतिहासिक संदर्भों के अनछुए तथ्यों को बहुत ही कलात्मक एवं रोचक तरीके से उद्धृत किया गया है।
यद्यपि यह लेखों का संग्रह है, परंतु तथ्यों एवं तर्कों के कारण यह पुस्तक मौलिक रूप में हमारे सामने आती है। देश-दुनिया के सामाजिक-साहित्यिक एवं राजनीतिक पात्रों जैसे कार्लाइल, गोर्की, गांधी, डॉ. हेडगेवार, बिपिन चंद्र पाल, राधा कुमुद मुखर्जी, माखनलाल चतुर्वेदी सहित सैकड़ों लोगों के जीवन-प्रसंगों का लेखक ने उपयोग किया है। यह पुस्तक भारतीय जीवन-दर्शन की एक प्रतिनिधि कृति की तरह है।”
Rs.255.00 Rs.300.00
| Weight | 0.350 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.5 × 1.5 in |
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