-15%
, , ,

Shiksha Ki Bharatiya Avadharna (PB)


“भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं शिक्षा-पद्धति ने केवल जीवन-मूल्य ही नहीं सृजित किए, केवल एक श्रेष्ठतम संस्कृति का ही विकास नहीं किया, अपितु इहलौकिक जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में अपने शोध, अध्ययन, अनुभव एवं दिव्य शक्तियों के प्रयोग और उपयोग से अद्वितीय योगदान किया। अत्यंत प्राचीन काल से भारतीय तीर्थ शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र थे।

बौद्ध-युग के साथ ही भारत में विश्वविद्यालयों की परिकल्पना साकार हो चुकी थी। तक्षशिला, काशी, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी, उज्जैन, सालोत्गी देवालय विद्यापीठ, एन्नामिरम् देवालय विद्यापीठ, तिरुमुक्कुदल देवालय विद्यापीठ, तिरुवोर्रियूर देवालय विद्यापीठ, मलकापुरम् देवालय विद्यापीठ जैसी अनेक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाएँ भारतीय शिक्षा पद्धति की अमूल्य धरोहर हैं, जिनकी अवधारणात्मक पृष्ठभूमि पर विश्व में आधुनिक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं का जन्म हुआ।

यह पुस्तक भारतीय दृष्टि एवं अवधारणा से अनुप्राणित शिक्षण संस्थानों का दिग्दर्शन करवाती है और भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता को रेखांकित करती है।”

Rs.299.00 Rs.350.00

महाराणा प्रताप पी.जी. कॉलेज, जंगल धूसड़, गोरखपुर में बी.एड. विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शिप्रा सिंह का जन्म 7 जनवरी, 1983 को गोरखपुर में हुआ। एम.एड., शिक्षाशास्त्र, समाजशास्त्र एवं प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि के साथ सन् 2017 में आपने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की उन्होंने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की। उत्तर प्रदेश शासन के ‘मिशन-शक्ति’ का समन्वयक बनकर शासकीय अभियान में अपने नवाचार के आधार पर उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दो बार राज्यस्तरीय ‘मिशन-शक्ति’ अवार्ड प्राप्त किया। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा अनुदानित प्रोजेक्ट ‘नाथपंथ योग, अध्यात्म एवं साधना’ में शोध- सहायक रहीं।

चार राष्ट्रीय एवं एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजक रहीं, 12 शोध-पत्र प्रकाशित तथा 8 शोध-पत्र विभिन्न राष्ट्रीय संगोष्ठियों में पढ़े गए एवं प्रशंसित हुए। श्रेष्ठतम शिक्षक का ‘सरस्वती-सम्मान’, राज्यस्तरीय ‘मिशन-शक्ति’ सम्मान-2021, कामधेनु चेयर द्वारा सन् 2022 में राष्ट्रीय स्तर का 15वाँ नेशनल वुमन एक्सीलेंस अवार्ड, दैनिक जागरण द्वारा राज्यस्तरीय ‘शिक्षक-सम्मान’ से अलंकृत ।

Weight 0.350 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

Author Shipra Singh
ISBN 9789355622426
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2024
Number of pages 176
Binding Style Soft Cover

Based on 0 reviews

0.0 overall
0
0
0
0
0

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

There are no reviews yet.