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Shreshtha Ki Abhivyakti Ho


“श्रेष्ठ की अभिव्यक्ति हो” शीर्षक से —सरल शब्दों व अति सरल भाषा एवं भावों मे , यह केवल एक रचना नहीं, बल्कि एक दिशा है।
यह शब्दों में बँधी वह आंतरिक पुकार है, जो मनुष्य को उसके उच्चतम स्वरूप की ओर आमंत्रित करती है।
अपना सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्त करो – अन्यों का सर्वश्रेष्ठ प्राप्त करो का मंत्र, जब जीवन मंत्र बन जाता हैं , तो जीवन एक नये आयाम को छूने लगता हैं।
चाव के इंजन से चलती हैं, दुनिया । सफलताएं खुली बुद्धि से आहूत होती है । विफलताओं में हरे वृक्ष जैसा नव सर्जन का सामर्थ्य आगे लेकर बढ़ता है ।
यह सम्पूर्ण रचना न तो किसी संप्रदाय की सीमा में है, न ही किसी एक विचारधारा की परिधि में। यह उस वैश्विक मानव चेतना का स्वर है, जो आत्मा की स्वतंत्रता, विवेक की स्पष्टता और कर्म की सार्थकता की ओर बढ़ना चाहती है।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है ,
* जो जीवन को केवल जीना नहीं, सार्थक बनाना चाहते हैं।
* जो निर्बंध चेतना के पथिक हैं,
* जो सज्जनों की संगति में, स्व-अनुशासन से, लोक-मंगल के कार्य में लीन रहना चाहते हैं।
* और स्वयं, समाज दोनो को सर्वश्रेष्ठ बनने की यात्रा पर है।
* इसकी पंक्तियां केवल पढ़ी नहीं जाती — इसे जिया जाता है

Rs.637.00 Rs.750.00

Author Om Prakash Dhankar
ISBN 9789355626134
Language Bilingual (Hindi and English)
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2025
Number of pages 56
Binding Style Hard Cover

Weight 0.450 kg
Dimensions 11.5 × 11.5 × 1.5 in

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