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“न जाने अनजाना है कौन वो
क्यों बढ़ीं इतनी नज़दीकियां
ख़यालों में मेरे उलझते गये
मन बावरी का बेलौस थिरक उठा।

कई बार सोचने लग जाती हूँ
कहीं भटकने तो नहीं लगी हूँ
कहीं आड़े ना आ जाऊँ उनके
मगर जाऊँ तो जाऊँ कहाँ!

भगवन का दिया प्रसाद है वो
प्रफुल्लित होती हूँ सोच-सोच।
अकुलाती होती हूँ कभी याद करके,
आशीर्वाद बन जो वो आ जाते।

मुझमें झूम रहे हैं वो मगन होकर
और दिखता है उनमें मेरा प्रेम
आत्मा और परमात्मा का सादृश्य मिलन
यही तो है मेरा प्यारा-सा उपहार।।।”

Rs.425.00 Rs.500.00

Author Bhawana Parajuli
ISBN 9789349116085
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2025
Number of pages 176
Binding Style Hard Cover

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.5 in

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