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Valmiki Aur Tulasi Ke Kavy Mein Maa Ganga


विश्वविख्यात और विश्ववंद्य महर्षि वाल्मीकि जी संस्कृत साहित्य के पहले कवि थे जिन्होंने महाकाव्य की विराट चेतना और भावना को आत्मसात् करने वाली एक ऐसी सुश्लोक अभिव्यंजना का आविष्कार किया था जो कि जीव मात्र के प्रति कारुण्य और हितैषिता से ओतप्रोत प्रबुद्धचेता की भावुक भाव-लहरी को स्वर दे सके। तुलसी एक ऐसी महत्वपूर्ण प्रतिभा थे, जो युगों के बाद एक बार आया करती है तथा ज्ञान-विज्ञान, भाव-विभाव अनेक तत्त्वों का समाहार होती है।’
रामभक्ति शाखा के कवियों में गोस्वामी तुलसीदास सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। इनका प्रमुख ग्रन्थ ‘श्रीरामचरितमानस’ भारत में ही नहीं वरन् सम्पर्ण विश्व में विख्यात है।
गंगा नदी के महत्व को वैष्णव शैव, साहित्यकार वैज्ञानिक सभी स्वीकार करते हैं; क्योंकि गंगा इनमें कोई भेद नहीं करती है। सभी को एक सूत्र में पिरोती है और एक सूत्र में बाँधे रखने का संकल्प प्रदान करती है गंगा।
भारत की राष्ट्र-नदी गंगा जीवन ही नहीं, अपितु मानवीय चेतना को भी प्रवाहित करती है। बाल्मीकि ने रामायण और तुलसी ने रामचरितमानस सहित अपने अन्य रचनाओं में माँ गंगा के महत्व को भक्तिभाव से रेखांकित किया है।

Rs.750.00

प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान हैं। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५०से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष है।

Weight 0.850 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9788119202737
Language Hindi
Publisher Luminous Books

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