Publisher: Bhuvan Vani Trust, Lucknow
Author: जयकृष्ण मिश्र ‘सर्वेश’ शास्त्री (Jaikrishna Mishra ‘Sarvesh’ Shastri)
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Cover: Hardcover
Valmiki Ramayana Set of 4 Volumes
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण के रचयिता आदिकवि श्री वाल्मीकि के काव्य का स्वाध्याय एवं अनुशीलन करने के पश्चात् ही मर्हष वेदव्यास आदि समस्त महाकवियों एवं मनोषियों ने पुराण, महाभारत तथा अन्यान्य काव्यों-महाकाव्यों आदि का प्रणयन किया है। मषि वाल्माकि की कान्तास्मित वाणी से ही कहा भी गया है-काव्य-गङ्गा का उद्गम माना जाता है, जैसा कि
मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत्क्रोञ्चमिथुनादेकमबधीः काममोहितम् ।।
अर्थात् क्रौञ्च (पक्षी) दम्पती के मिथुन-काल में ही व्याध ने एक का वध कर डाला, तभी महषि के मुख से सहसा यह करुण काव्य निःसृत हुआ ऐ निषाद ! इससे तुम्हें कभी प्रतिष्ठा न मिलेगी; तथा स्वयं वाल्मीकि जी भी कहते हैं- “निषादविद्धाण्डजदर्शनोत्थः, श्लोकत्व मापद्यत यस्य शोकः” आदि से काव्य का समुद्गम महर्षि वाल्मीकि की करुण वाणी से ही प्रमाणित है। यद्यपि मर्षि वाल्मीकि से पहले भी काव्य था, छन्द थे, रस और अलंकार थे । साक्षात् ब्रह्म के मुख से चारों वेद प्रकट हुए थे, जिसमें काव्य के समस्त गुण विद्यमान हैं, अतः श्री वाल्मीकि को हो काव्य का जनक क्यों माना जाता है ? इसके उत्तर में यह कहना ही समीचीन होगा कि वेदों में जो कुछ भी कहा गया है वह काव्य नहीं, मन्त्र हैं। मन्त्र स्वयं वेद भगवान (ब्रह्म) के मुख से निःसृत हैं पर मानव के रूप में काव्य का निःसरण श्री वाल्मीकि के मुख से ही हुआ है। इस प्रकार रामायण’ आदिकवि का आदिकाव्य है।
मषि वाल्मीकि के जन्मस्थान का वृत्त तो ज्ञात नहीं हो सका किन्तु उनके आश्रमों का उल्लेख अवश्य मिलता है। ये सदा भ्रमण करते रहते थे, अतः इन्होंने अनेक स्थानों में अपने आश्रम बनाये थे। तमसा नदी के तट पर गंगा के उत्तर और अयोध्या के दक्षिण में, प्रयाग झाँसी और राजापुर-मानिकपुर मार्ग में संगम में, वारिपुर-दिगपुर के मध्य विलसित भूमि में, विदिशा (भेलसा, मध्यभारत) में और उत्पलारण्य उत्पलावर्त (ब्रह्मावर्त-बिठूर-कानपुर) में महर्षि के आश्रमों का वर्णन यत्न-तत्र मिलता है।
मषि ने रामायण की ही रचना क्यों की ? इसका उत्तर सुस्पष्ट है कि सप्तर्षियों ने इन्हें बताया था कि श्रीराम ही साक्षात् ब्रह्म हैं,
Rs.1,200.00
| Weight | 3.850 kg |
|---|---|
| Dimensions | 9 × 5.7 × 6.7 in |
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संदीप देव

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