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Visaila Vampanth (PB)


यह किताब किसी विद्वता के भ्रम में नही लिखी गई है l ऐतिहासिक घटनाओं और तारीखों की एक्यूरेसी के लिए इसे एक रेफरेंस बुक भी नही होना है l इस किताब का स्तर चाय की दुकानों और चौक चौराहों पर होने वाली चर्चा से जरा भी उपर नहीं, ऐसा कोई प्रयास भी नहीं किया गया ना ही ऐसी कोई मंशा थी l यह किताब पढ़ने के लिए लिखी गई है, ड्राइंग रूम में सजाने के लिए तो बिलकुल नहीं l

में चाहता हूँ कि यह उन सस्ती किताबों में गिनी जाये जिसे आप रेलवे स्टेशन पर खरीदें, ट्रेन की यात्रा में पढ़ें और खत्म करने के बाद अपने साथ ले जाने का कस्ट ना करे l इसे आप उसी सीट पर छोर जाएँ जिसे आपके बाद उस सीट पर बैठने वाला अगला यात्री पढ़ें l ट्रेन में काम करने वाले वेंडर, मूँगफली बेचने वाले पढ़ें, कुली और झाडू देने वाले पढ़ें I पढ़ें और सोचें l यह उन किताबों में ना गिनी जाये जिसकी दस लाख प्रतियाँ बिके और दस हजार लोग भी उसे खत्म ना कर पाएँ l बल्कि इसकी पाँच हजार प्रतियाँ बिके तो एक लाख लोग उसे पढ़ें I आप पढ़ें और इसे कलेक्ट करने लायक ना समझें, अगले को बढ़ा दे l दार्शनिक विद्वता, ऐतिहासिक एक्यूरेसी, साहित्यिक सौंदर्य से विहीन इस पुस्तक का एक दावा मैं फिर भी रखना चाऊँगा… वैचारिक प्रमाणिकता का l यह किताब अपनी सोच से लिखी गई है l दुनिया जैसी दिखी, जैसी सोची समझी गयी वैसी लिख डाली गयी l इसमें भारी भरकम ज्ञान और राजनैतिक प्रतिबद्धता का मिर्च मसाला नहीं मिलाया गया है l यह विश्वविद्यालयों में रिसर्च कर रहे बौद्धिक जनों और मीडिया में ज्ञान बाँट रहे बुधिजीवियों के लिए नहीं है l यह हमारे आपके लिए है l इसमें अगली पीढ़ी के भविष्य की चिंता है l देश और समाज के कल का चिंतन है l जो है, सत्यनिष्ठा से और अपनी सरल बुद्धि से सोचा हुआ है और आपके सामने है…

Rs.225.00 Rs.250.00

Title: Visaila Vampanth
Author: Dr. Rajiv Mishra
ISBN 13: 9788195453054
ISBN 10: 8195453058
Year: 2024

Weight 0.280 kg
Dimensions 8.5 × 5.5 × 1.0 in

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