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प्राचीन विद्याओं के गवेषण, संरक्षण, उन्नयन और प्रोत्साहन देने का जहाँ तक प्रश्न है, गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय का इस क्षेत्र में महनीय योगदान देता रहा है। इस विश्वविद्यालय ने अपने सुदीर्घ इतिहास में देश को अनेक सुयोग्य विद्वान् प्रदान किये, जिनके द्वारा किये गये कार्य से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि दोनों बढ़ी हैं।
किसी भी विश्वद्यालय की पहिचान उसके द्वारा किया गया शोधकार्य होता है, इस दृष्टि से हमारा विश्वविद्यालय निरन्तर अनुसन्धान के क्षेत्र में अपना अवदान दे रहा है। प्राच्य विद्याओं के क्षेत्र में गम्भीर अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिये विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वीकृति लेकर वैदिक साहित्य के क्षेत्र में शोधकार्य करने के लिये श्रद्धानन्द वैदिक शोधसंस्थान नाम से एक शोधसंस्थान स्थापित किया। प्रसन्नता की बात है कि समय के साथ यह विभाग देश-विदेश में अपनी पहिचान बना रहा है।
जब मैंने जुलाई २०१३ में इस विश्वविद्यालय के कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण किया, उस समय विभागों की समीक्षा करते हुए श्रद्धानन्द वैदिक शोधसंस्थान के कार्यों से भी अवगत होने का मुझे अवसर मिला। यह जानकर अच्छा लगा कि यह विभाग शोध के क्षेत्र में गम्भीरता पूर्वक कार्य कर रहा है। मैंने विभाग के अध्यक्ष प्रो. ज्ञानप्रकाश शास्त्री को उपनिषदों के पदानुक्रमकोष के प्रणयन का दायित्व सौंपा, यह एक विस्तृत एवं जटिल कार्य था, मेरे अनुसार इस कार्य को सम्पन्न होने में कई वर्षों का समय लगना चाहिये था, परन्तु प्रो. शास्त्री ने डेढ़ वर्ष के अल्प समय में इस कार्य को पूर्ण कर दिया है। यह कार्य औपनिषदिक-पदानुक्रम-कोषः नाम से प्रकाशित होने जा रहा है। अतः इस कार्य के लिये मैं श्रद्धानन्द वैदिक शोधसंस्थान तथा प्रो. ज्ञान प्रकाश शास्त्री को साधुवाद देता हूँ।
इससे पूर्व भी प्रो. ज्ञानप्रकाश शास्त्री ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से प्राप्त बृहद् शोधपरियोजना के माध्यम से ऋम्भाष्य-पदार्थ-कोष का कार्य पूर्ण किया और वह आठ भागों में प्रकाशित हो चुका है। इसके अतिरिक्त विभाग से महर्षि दयानन्द के समस्त साहित्य को आधार बनाकर दयानन्द-सन्दर्भ-कोष नाम से कार्य किया और वह तीन भागों में प्रकाशित हो चुका है। उक्त के अतिरिक्त भी अनेक महत्त्वपूर्ण कार्य विभाग के प्राध्यापकों के द्वारा किये गये हैं और किये जा रहे हैं। अब तक विभाग से ५० से अधिक पुस्तकों का लेखन/सम्पादन होकर प्रकाशन हो चुका है।
मैंने विभाग को महाभारत-पदानुक्रम-कोषः नाम से एक और महत्त्वाकांक्षी योजना पर कार्य करने के लिये प्रेरित किया है तथा इस हेतु विभाग को समुचित बजट भी उपलब्ध कराया गया है। मुझे विश्वास दिलाया गया है कि उक्त कार्य भी २०१६ में पूर्ण हो जायेगा। इसी प्रकार विश्वविद्यालय की अपेक्षाओं के अनुरूप यह विभाग कार्य करता रहेगा, ऐसा मुझे विश्वास है।

Rs.4,500.00

Publisher: Parimal Publication Pvt. Ltd.
Author: प्रो. ज्ञानप्रकाश शास्त्री और डॉ. विजय कुमार त्यागी (Prof. Jnan Prakash Shastri & Dr. Vijay Kumar Tyagi)
Language: Sanskrit Only
Cover: Hardcover
ISBN: 9788171105038

Weight 4.800 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

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